عَيْنًا يَشْرَبُ بِهَا الْمُقَرَّبُونَ
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
हाल यह है कि वह एक स्रोत है, जिसपर बैठकर सामीप्य प्राप्त लोग पिएँगे
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
वह एक चश्मा है जिसमें मुक़रेबीन पियेंगे
Quran
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हिन्दी
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