كَلَّا إِنَّ كِتَابَ الْفُجَّارِ لَفِي سِجِّينٍ
फ़ारूक़ ख़ान & अहमद
कुछ नहीं, निश्चय ही दुराचारियों का काग़ज 'सिज्जीन' में है
फ़ारूक़ ख़ान & नदवी
सुन रखो कि बदकारों के नाम ए अमाल सिज्जीन में हैं
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